Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 18 / Mantra 3

87 Sukta
5 Mantra
5/18/3
Devata- अग्निः Rishi- दितो मृतवाहा आत्रेयः Chhanda- भुरिगुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
तं वो॑ दी॒र्घायु॑शोचिषं गि॒रा हु॑वे म॒घोना॑म्। अरि॑ष्टो॒ येषां॒ रथो॒ व्य॑श्वदाव॒न्नीय॑ते ॥३॥

तम् । वः॒ । दी॒र्घायु॑ऽशोचिषम् । गि॒रा । हु॒वे॒ । म॒घोना॑म् । अरि॑ष्टः । येषा॑म् । रथः॑ । वि । अ॒श्व॒ऽदा॒व॒न् । ईय॑ते ॥

Mantra without Swara
तं वो दीर्घायुशोचिषं गिरा हुवे मघोनाम्। अरिष्टो येषां रथो व्यश्वदावन्नीयते ॥

तम्। वः। दीर्घायुऽशोचिषम्। गिरा। हुवे मघोनाम्। अरिष्टः। येषाम्। रथः। वि। अश्वऽदावन्। ईयते ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 10 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (येषाम्) जिन अतिथियों और (मघोनाम्) बहुत धन से युक्त (वः) आप लोगों का (अरिष्टः) नहीं हिंसा करने योग्य (रथः) वाहन (वि, ईयते) विशेषता से चलता है, उनका मैं (हुवे) आह्वान करता हूँ और हे (अश्वदावन्) व्याप्त करनेवाले विज्ञान आदि गुणों के दाता गृहस्थ ! आपके कल्याण के लिये (तम्) उस (दीर्घायुशोचिषम्) दीर्घ अर्थात् अधिक अवस्था पवित्र करनेवाली जिसकी ऐसे अतिथि विद्वान् का मैं (गिरा) वाणी से आह्वान करता हूँ ॥३॥
Essence
जो अहिंसादि धर्म से युक्त मनुष्य अतिकालपर्य्यन्त जीवनेवाले धार्मिक अतिथियों की सेवा करते हैं, वे भी दीर्घायु और लक्ष्मीवान् होकर आनन्दित होते हैं ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥