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Rigveda Mandal 5 / Sukta 13 / Mantra 2

87 Sukta
6 Mantra
5/13/2
Devata- अग्निः Rishi- सुतम्भर आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒ग्नेः स्तोमं॑ मनामहे सि॒ध्रम॒द्य दि॑वि॒स्पृशः॑। दे॒वस्य॑ द्रविण॒स्यवः॑ ॥२॥

अ॒ग्नेः । स्तोम॑म् । म॒ना॒म॒हे॒ । सि॒ध्रम् । अ॒द्य । दि॒वि॒ऽस्पृशः॑ । दे॒वस्य॑ । द्र॒वि॒ण॒स्यवः॑ ॥

Mantra without Swara
अग्नेः स्तोमं मनामहे सिध्रमद्य दिविस्पृशः। देवस्य द्रविणस्यवः ॥

अग्नेः। स्तोमम्। मनामहे। सिध्रम्। अद्य। दिविऽस्पृशः। देवस्य। द्रविणस्यवः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 5 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (द्रविणस्यवः) अपने धन की इच्छा करनेवाले हम लोग (अद्य) आज (दिविस्पृशः) परमात्मा में सुख को स्पर्श करनेवाले (देवस्य) प्रकाशमान (अग्नेः) अग्नि के (सिध्रम्) साधक (स्तोमम्) गुण, कर्म और स्वभाव की प्रशंसा को (मनामहे) मानते हैं, वैसे इसको आप लोग भी जानो ॥२॥
Essence
जिनकी धन की इच्छा होवे, वे अग्नि आदि पदार्थों के विज्ञान को ग्रहण करें ॥२॥
Subject
अब अग्निगुणों को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥