Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 12 / Mantra 6

87 Sukta
6 Mantra
5/12/6
Devata- अग्निः Rishi- सुतम्भर आत्रेयः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यस्ते॑ अग्ने॒ नम॑सा य॒ज्ञमीट्ट॑ ऋ॒तं स पा॑त्यरु॒षस्य॒ वृष्णः॑। तस्य॒ क्षयः॑ पृ॒थुरा सा॒धुरे॑तु प्र॒सर्स्रा॑णस्य॒ नहु॑षस्य॒ शेषः॑ ॥६॥

यः । ते॒ । अ॒ग्ने॒ । नम॑सा । य॒ज्ञम् । ईट्टे॑ । ऋ॒तम् । सः । पा॒ति॒ । अ॒रु॒षस्य॑ । वृष्णः॑ । तस्य॑ । क्षयः॑ । पृ॒थुः । आ । सा॒धुः । ए॒तु॒ । प्र॒ऽसर्स्रा॑णस्य । नहु॑षस्य । शेषः॑ ॥

Mantra without Swara
यस्ते अग्ने नमसा यज्ञमीट्ट ऋतं स पात्यरुषस्य वृष्णः। तस्य क्षयः पृथुरा साधुरेतु प्रसर्स्राणस्य नहुषस्य शेषः ॥

यः। ते। अग्ने। नमसा। यज्ञम्। ईट्टे। ऋतम्। सः। पाति। अरुषस्य। वृष्णः। तस्य। क्षयः। पृथुः। आ। साधुः। एतु। प्रऽसस्रर्णास्य। नहुषस्य। शेषः ॥६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 4 Mantra » 6

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) राजन् ! (अरुषस्य) नहीं हिंसा करने और (वृष्णः) सुख के वर्षानेवाले (तस्य) उन (ते) आपका (यः) जो (पृथुः) विस्तारयुक्त (प्रसर्स्राणस्य) अत्यन्त धर्म को प्राप्त हुए (नहुषस्य) मनुष्य के (शेषः) बाकी रहे के सदृश (साधुः) श्रेष्ठ (क्षयः) निवास (नमसा) अन्न आदि से (यज्ञम्) यज्ञ को (ईट्टे) ऐश्वर्ययुक्त करता है (सः) वह (ऋतम्) सत्य-न्याय की (पाति) रक्षा करता है, वह हम लोगों को (आ, एतु) सब प्रकार प्राप्त हो ॥६॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो विद्वानों की सेवा और धर्म की रक्षा करता है, उसके रक्षण को आप लोग करके शेष सुख को प्राप्त हूजिये ॥६॥ इस सूक्त में अग्नि और विद्वान् के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह बारहवाँ सूक्त और चौथा वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥