Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 11 / Mantra 1

87 Sukta
6 Mantra
5/11/1
Devata- अग्निः Rishi- सुतम्भर आत्रेयः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
जन॑स्य गो॒पा अ॑जनिष्ट॒ जागृ॑विर॒ग्निः सु॒दक्षः॑ सुवि॒ताय॒ नव्य॑से। घृ॒तप्र॑तीको बृह॒ता दि॑वि॒स्पृशा॑ द्यु॒मद्वि भा॑ति भर॒तेभ्यः॒ शुचिः॑ ॥१॥

जन॑स्य । गो॒पाः । अ॒ज॒नि॒ष्ट॒ । जागृ॑विः । अ॒ग्निः । सु॒ऽदक्षः॑ । सु॒वि॒ताय॑ । नव्य॑से । घृ॒तऽप्र॑तीकः । बृ॒ह॒ता । दि॒वि॒ऽस्पृशा॑ । द्यु॒ऽमत् । वि । भा॒ति॒ । भ॒र॒तेभ्यः॑ । शुचिः॑ ॥

Mantra without Swara
जनस्य गोपा अजनिष्ट जागृविरग्निः सुदक्षः सुविताय नव्यसे। घृतप्रतीको बृहता दिविस्पृशा द्युमद्वि भाति भरतेभ्यः शुचिः ॥

जनस्य। गोपाः। अजनिष्ट। जागृविः। अग्निः। सुऽदक्षः। सुविताय। नव्यसे। घृतऽप्रतीकः। बृहता। दिविऽस्पृशा। द्युऽमत्। वि। भाति। भरतेभ्यः। शुचिः ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 3 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (जनस्य) मनुष्य की (गोपाः) रक्षा करने और (जागृविः) जागनेवाला (सुदक्षः) अच्छे प्रकार बल जिससे (घृतप्रतीकः) और घृत वा जल प्रतीतिकर जिसका ऐसा (शुचिः) पवित्र (अग्निः) अग्नि (बृहता) बड़े (दिविस्पृशा) प्रकाश में स्पर्श करनेवाले से (नव्यसे) अत्यन्त नवीन (सुविताय) ऐश्वर्य के लिये (अजनिष्ट) उत्पन्न होता तथा (भरतेभ्यः) धारण और पोषण करनेवाले मनुष्यों के लिये (द्युमत्) प्रकाश के सदृश (वि) विशेष करके (भाति) प्रकाशित होता है, उसको यथावत् जानिये ॥१॥
Essence
विद्वानों को चाहिये कि अग्नि आदि पदार्थों के गुण अवश्य जानें ॥१॥
Subject
अब छः ऋचावाले ग्याहवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में अग्नि के गुणों का उपदेश करते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.