Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 10 / Mantra 6

87 Sukta
7 Mantra
5/10/6
Devata- अग्निः Rishi- गय आत्रेयः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
नू नो॑ अग्न ऊ॒तये॑ स॒बाध॑सश्च रा॒तये॑। अ॒स्माका॑सश्च सू॒रयो॒ विश्वा॒ आशा॑स्तरी॒षणि॑ ॥६॥

नु । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । ऊ॒तये॑ । स॒ऽबाध॑सः । च॒ । रा॒तये॑ । अ॒स्माका॑सः । च॒ । सू॒रयः॑ । विश्वाः॑ । आसाः॑ । त॒री॒षणि॑ ॥

Mantra without Swara
नू नो अग्न ऊतये सबाधसश्च रातये। अस्माकासश्च सूरयो विश्वा आशास्तरीषणि ॥

नू। नः। अग्ने। ऊतये। सऽबाधसः। च। रातये। अस्माकासः। च। सूरयः। विश्वाः। आशाः। तरीषणि ॥६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 2 Mantra » 6

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वन् राजन् ! जो (सबाधसः) बाध के सहित वर्त्तमान (च) और (अस्माकासः) हम लोगों के सम्बन्धी (सूरयः) विद्वान् जन (नः) हम लोगों की (ऊतये) रक्षा आदि के लिये और (रातये) दान के लिये (च) भी (विश्वाः) सम्पूर्ण (आशाः) दिशाओं को (तरीषणि) तरण में, हम लोगों को (नू) शीघ्र पहुँचावें, वे परोपकारी होते हैं ॥६॥
Essence
वे ही चतुर विद्वान् हैं, जो विमान आदि वाहनों को रच के भूगोल में चारों ओर घुमाते हैं, वे प्रशंसित दानवाले होते हैं ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.