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Rigveda Mandal 4 / Sukta 9 / Mantra 7

58 Sukta
8 Mantra
4/9/7
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒स्माकं॑ जोष्यध्व॒रम॒स्माकं॑ य॒ज्ञम॑ङ्गिरः। अ॒स्माकं॑ शृणुधी॒ हव॑म् ॥७॥

अ॒स्माक॑म् । जो॒षि॒ । अ॒ध्व॒रम् । अ॒स्माक॑म् । य॒ज्ञम् । अ॒ङ्गि॒रः॒ । अ॒स्माक॑म् । शृ॒णु॒धि॒ । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
अस्माकं जोष्यध्वरमस्माकं यज्ञमङ्गिरः। अस्माकं शृणुधी हवम् ॥

अस्माकम्। जोषि। अध्वरम्। अस्माकम्। यज्ञम्। अङ्गिरः। अस्माकम्। शृणुधि। हवम्॥७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 9 Mantra » 7

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Meaning
हे (अङ्गिरः) प्राण के सदृश प्रिय राजन् ! जिससे आप (अस्माकम्) हम लोगों के (अध्वरम्) न्यायव्यवहार और (अस्माकम्) हम लोगों के (यज्ञम्) विद्वानों के सत्कार आदि क्रियामय व्यवहार को (जोषि) सेवन करते हो इससे (अस्माकम्) हम लोगों के (हवम्) शब्द अर्थ सम्बन्धरूप विषय को (शृणुधि) सुनिये ॥७॥
Essence
हे राजन् ! जिससे कि आप हम लोगों की रक्षा करनेवाले प्रिय हैं, इससे अर्थी अर्थात् मुद्दई और प्रत्यर्थी अर्थात् मुद्दायले के वचनों को सुन के निरन्तर न्याय विधान करो ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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