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Rigveda Mandal 4 / Sukta 9 / Mantra 6

58 Sukta
8 Mantra
4/9/6
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वेषीद्व॑स्य दू॒त्यं१॒॑ यस्य॒ जुजो॑षो अध्व॒रम्। ह॒व्यं मर्त॑स्य॒ वोळ्ह॑वे ॥६॥

वेषि॑ । इत् । ऊँ॒ इति॑ । अ॒स्य॒ । दू॒त्य॑म् । यस्य॑ । जुजो॑षः । अ॒ध्व॒रम् । ह॒व्यम् । मर्त॑स्य । वोळ्ह॑वे ॥

Mantra without Swara
वेषीद्वस्य दूत्यं१ यस्य जुजोषो अध्वरम्। हव्यं मर्तस्य वोळ्हवे ॥

वेषि। इत्। ऊम् इति। अस्य। दूत्यम्। यस्य। जुजोषः। अध्वरम्। हव्यम्। मर्तस्य। वोळ्हवे॥६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 9 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! जो आप (यस्य) जिस (मर्तस्य) मनुष्य के (दूत्यम्) दूतसम्बन्धी कर्म्म को (वेषि) प्राप्त होते हो और जिसके (वोळ्हवे) प्राप्त होने के लिये (हव्यम्) ग्रहण करने योग्य (अध्वरम्) हिंसारहित व्यवहार का (उ) ही (जुजोषः) सेवन करो (इत्) वही आप (अस्य) इसके दूत होने के योग्य हैं ॥६॥
Essence
हे राजा लोगो ! जो पूर्ण विद्यायुक्त बहुत बोलनेवाले स्नेही और धार्मिक जन हैं और जो लोग राज्य के व्यवहार को धारण कर सकते हैं, उन शूरवीर मित्रों को समाचारप्रापक बना और राज्य के समाचारों को जान के विशेष प्रबन्ध करो ॥६॥
Subject
अब राजविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥