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Rigveda Mandal 4 / Sukta 9 / Mantra 5

58 Sukta
8 Mantra
4/9/5
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिपाद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वेषि॒ ह्य॑ध्वरीय॒तामु॑पव॒क्ता जना॑नाम्। ह॒व्या च॒ मानु॑षाणाम् ॥५॥

वेषि॑ । हि । अ॒ध्व॒रि॒ऽय॒ताम् । उ॒प॒ऽव॒क्ता । जना॑नाम् । ह॒व्या । च॒ । मानु॑षाणाम् ॥

Mantra without Swara
वेषि ह्यध्वरीयतामुपवक्ता जनानाम्। हव्या च मानुषाणाम् ॥

वेषि। हि। अध्वरिऽयताम्। उपऽवक्ता। जनानाम्। हव्या। च। मानुषाणाम्॥५॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 9 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! जिससे आप (अध्वरीयताम्) अपने को अहिंसारूप यज्ञ करनेवाले (मानुषाणाम्) मनुष्यों में उत्पन्न (जनानाम्) प्रसिद्ध पुरुषों को (उपवक्ता) उपदेश देनेवालों के भी उपदेशक हुए (हि) ही (हव्या) देने योग्य वस्तुओं को (च) भी (वेषि) प्राप्त होते हो, इससे उपदेश करने के योग्य हो ॥५॥
Essence
जो उपदेश देनेवाले लोग धर्म्म के उपदेश देनेवालों को उत्पन्न करते और उत्तम प्रकार शिक्षित और उपदेश देने के लिये प्रवृत्त करके मनुष्यों को बोध कराते हैं, वे ही संसार के कल्याण करनेवाले होते हैं ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥