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Rigveda Mandal 4 / Sukta 9 / Mantra 3

58 Sukta
8 Mantra
4/9/3
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स सद्म॒ परि॑ णीयते॒ होता॑ म॒न्द्रो दिवि॑ष्टिषु। उ॒त पोता॒ नि षी॑दति ॥३॥

सः । सद्म॑ । परि॑ । नी॒य॒ते॒ । होता॑ । म॒न्द्रः । दिवि॑ष्टिषु । उ॒त । पोता॑ । नि । सी॒द॒ति॒ ॥

Mantra without Swara
स सद्म परि णीयते होता मन्द्रो दिविष्टिषु। उत पोता नि षीदति ॥

सः। सद्म। परि। नीयते। होता। मन्द्रः। दिविष्टिषु। उत। पोता। नि। सीदति॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 9 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (मन्द्रः) आनन्द का दाता (होता) दानकर्त्ता और (उत) भी (पोता) पवित्र करनेवाला (दिविष्टिषु) पक्षेष्टि आदि उत्तम व्यवहारों के निमित्त (सद्म) बैठते हैं जिसमें उस गृह में (नि, सीदति) बैठता है (सः) वह विद्वान् विद्वानों को (परि) सब प्रकार (नीयते) प्राप्त होता है ॥३॥
Essence
जहाँ पवित्र आनन्दयुक्त और विद्या आदि के देनेवाले लोग हैं, वहीं सम्पूर्ण विनय होता है ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥