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Rigveda Mandal 4 / Sukta 9 / Mantra 2

58 Sukta
8 Mantra
4/9/2
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स मानु॑षीषु दू॒ळभो॑ वि॒क्षु प्रा॒वीरम॑र्त्यः। दू॒तो विश्वे॑षां भुवत् ॥२॥

सः । मानु॑षीषु । दुः॒ऽदभः॑ । वि॒क्षु । प्र॒ऽअ॒वीः । अम॑र्त्यः । दू॒तः । विश्वे॑षाम् । भु॒व॒त् ॥

Mantra without Swara
स मानुषीषु दूळभो विक्षु प्रावीरमर्त्यः। दूतो विश्वेषां भुवत् ॥

सः। मानुषीषु। दुःऽदभः। विक्षु। प्रऽअवीः। अमर्त्यः। दूतः। विश्वेषाम्। भुवत्॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 9 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (मानुषीषु) मनुष्यसंबन्धी (विक्षु) प्रजाओं में (विश्वेषाम्) सब की (प्रावीः) उत्तम विद्या में व्याप्त (अमर्त्यः) मर्त्य के स्वभाव से रहित (दूतः) सम्पूर्ण विद्याओं का प्राप्त करानेवाला (भुवत्) होता है (सः) वह इस संसार में (दूळभः) दुर्लभ है, ऐसा जानना चाहिये ॥२॥
Essence
जो विद्वान् लोग सब लोगों के सुखसाधक विद्या के देनेवाले और मनुष्यों को धर्म के आचरण में प्रवेश करानेवाले स्वयं धार्मिक होवें, वे संसार में दुर्लभ हैं ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥