Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 8 / Mantra 5

58 Sukta
8 Mantra
4/8/5
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ते स्या॑म॒ ये अ॒ग्नये॑ ददा॒शुर्ह॒व्यदा॑तिभिः। य ईं॒ पुष्य॑न्त इन्ध॒ते ॥५॥

ते । स्या॒म॒ । ये । अ॒ग्नये॑ । द॒दा॒शुः । ह॒व्यऽदा॑तिभिः । ये । ई॒म् । पुष्य॑न्तः । इ॒न्ध॒ते ॥

Mantra without Swara
ते स्याम ये अग्नये ददाशुर्हव्यदातिभिः। य ईं पुष्यन्त इन्धते ॥

ते। स्याम। ये। अग्नये। ददाशुः। हव्यदातिऽभिः। ये। ईम्। पुष्यन्तः। इन्धते॥५॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 8 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(ये) जो (हव्यदातिभिः) देने योग्य वस्तुओं के दानों से (अग्नये) अग्निविद्या की प्राप्ति के लिये (ददाशुः) द्रव्य आदि पदार्थ देते हैं और (ये) जो लोग (ईम्) जल को (पुष्यन्तः) पुष्ट करते हुए (इन्धते) प्रकाशित होते हैं (ते) वे सुखी हैं, उनके साथ हम लोग सुखी (स्याम) होवें ॥५॥
Essence
जो मनुष्य अग्नि आदि पदार्थों की विद्या की प्राप्ति के लिये बहुत खर्चते हैं, वे सब से सब प्रकार सब सुखों से पुष्ट हुए आनन्दित होते हैं ॥५॥
Subject
अब अग्नि विद्या के जाननेवाले विद्वान् के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.