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Rigveda Mandal 4 / Sukta 8 / Mantra 3

58 Sukta
8 Mantra
4/8/3
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स वे॑द दे॒व आ॒नमं॑ दे॒वाँ ऋ॑ताय॒ते दमे॑। दाति॑ प्रि॒याणि॑ चि॒द्वसु॑ ॥३॥

सः । वे॒द॒ । दे॒वः । आ॒ऽनम॑म् । दे॒वान् । ऋ॒त॒ऽय॒ते । दमे॑ । दाति॑ । प्रि॒याणि॑ । चि॒त् । वसु॑ ॥

Mantra without Swara
स वेद देव आनमं देवाँ ऋतायते दमे। दाति प्रियाणि चिद्वसु ॥

सः। वेद। देवः। आऽनमम्। देवान्। ऋतऽयते। दमे। दाति। प्रियाणि। चित्। वसु॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 8 Mantra » 3

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Meaning
हे मनुष्यो ! जिसको यथार्थवक्ता (देवः) कामना करता हुआ विद्वान् जन (वेद) जानता है (सः) वह (देवान्) पृथिवी आदि पदार्थ वा विद्वानों के (आनमम्) सब प्रकार सत्कार करने को (ऋतायते) सत्य के सदृश आचरण और (दमे) गृह में (चित्) भी (प्रियाणि) सुन्दर (वसु) द्रव्यों को (दाति) देता है, ऐसा जानो ॥३॥
Essence
हे मनुष्यो ! सम्पूर्ण पृथिवी आदि श्रेष्ठ पदार्थों के बीच जो अग्निदेव है, उससे इस सब ऐश्वर्य का देनेवाला बड़ा देव जानो ॥३॥
Subject
फिर अग्नि के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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