Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 7 / Mantra 5

58 Sukta
11 Mantra
4/7/5
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
तमीं॒ होता॑रमानु॒षक्चि॑कि॒त्वांसं॒ नि षे॑दिरे। र॒ण्वं पा॑व॒कशो॑चिषं॒ यजि॑ष्ठं स॒प्त धाम॑भिः ॥५॥

तम् । ई॒म् । होता॑रम् । आ॒नु॒षक् । चि॒कि॒त्वांस॑म् । नि । से॒दि॒रे॒ । र॒ण्वम् । पा॒व॒कऽशो॑चिषम् । यजि॑ष्ठम् । स॒प्त । धाम॑ऽभिः ॥

Mantra without Swara
तमीं होतारमानुषक्चिकित्वांसं नि षेदिरे। रण्वं पावकशोचिषं यजिष्ठं सप्त धामभिः ॥

तम्। ईम्। होतारम्। आनुषक्। चिकित्वांसम्। नि। सेदिरे। रण्वम्। पावकऽशोचिषम्। यजिष्ठम्। सप्त। धामऽभिः॥५॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 6 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो लोग (तम्) उसको अग्नि के सदृश (आनुषक्) अनुकूलता से (होतारम्) ग्रहण करनेवाले (चिकित्वांसम्) विद्वान् (रण्वम्) सुन्दर (सप्त) सात प्राण आदि (धामभिः) स्थानों से (पावकशोचिषम्) अग्नि के तेज के सदृश तेज से युक्त (यजिष्ठम्) अत्यन्त मेल करनेवाले को (ईम्) सब प्रकार से (नि, सेदिरे) प्राप्त होते हैं, वे राज्य और ऐश्वर्य से युक्त होते हैं ॥५॥
Essence
जो लोग बिजुलीरूप अग्नि को सब पदार्थों से निकालना जानते हैं, वे अत्यन्त सुखी होते हैं ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥