Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 55 / Mantra 6

58 Sukta
10 Mantra
4/55/6
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
नू रो॑दसी॒ अहि॑ना बु॒ध्न्ये॑न स्तुवी॒त दे॑वी॒ अप्ये॑भिरि॒ष्टैः। स॒मु॒द्रं न सं॒चर॑णे सनि॒ष्यवो॑ घ॒र्मस्व॑रसो न॒द्यो॒३॒॑ अप॑ व्रन् ॥६॥

नु । रो॒द॒सी॒ इति॑ । अहि॑ना । बु॒ध्न्ये॑न । स्तु॒वी॒त । दे॒वी॒ इति॑ । अप्ये॑भिः । इ॒ष्टैः । स॒मु॒द्रम् । न । स॒म्ऽचर॑णे । स॒नि॒ष्यवः॑ । घ॒र्मऽस्व॑रसः । न॒द्यः॑ । अप॑ । व्र॒न् ॥

Mantra without Swara
नू रोदसी अहिना बुध्न्येन स्तुवीत देवी अप्येभिरिष्टैः। समुद्रं न संचरणे सनिष्यवो घर्मस्वरसो नद्यो३ अप व्रन् ॥

नु। रोदसी इति। अहिना। बुध्न्येन। स्तुवीत। देवी इति। अप्येभिः। इष्टैः। समुद्रम्। न। सम्ऽचरणे। सनिष्यवः। घर्मऽस्वरसः। नद्यः। अप। व्रन् ॥६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 7 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! (घर्मस्वरसः) यज्ञ में अपने रसवाले आप जैसे (इष्टैः) मिलने और प्राप्त होने योग्य (अप्येभिः) जल में उत्पन्न हुए पदार्थों के साथ (सनिष्यवः) विभाग करती हुई (नद्यः) नदियाँ (सञ्चरणे) सुन्दर गमन में (समुद्रम्) अन्तरिक्ष के (न) तुल्य (अप, व्रन्) ढाँपती हैं, वैसे (बुध्न्येन) अन्तरिक्ष में हुए (अहिना) मेघ के सहित (देवी) प्रकाशमान (रोदसी) अन्तरिक्ष और पृथिवी की (नू) शीघ्र (स्तुवीत) प्रशंसा करें ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे मनुष्यो ! जैसे मेघों के जलों से पूर्ण नदियाँ आवरणों को काट कर अन्तरिक्ष में जलों को प्राप्त होती हैं, वैसे ही आप लोग विद्या की दीप्ति को प्राप्त होकर सब विद्याओं की प्रशंसा करो ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.