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Rigveda Mandal 4 / Sukta 52 / Mantra 3

58 Sukta
7 Mantra
4/52/3
Devata- उषाः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त सखा॑स्य॒श्विनो॑रु॒त मा॒ता गवा॑मसि। उ॒तोषो॒ वस्व॑ ईशिषे ॥३॥

उ॒त । सखा॑ । अ॒सि॒ । अ॒श्विनोः॑ । उ॒त । मा॒ता । गवा॑म् । अ॒सि॒ । उ॒त । उ॒षः॒ । वस्वः॑ । ई॒शि॒षे॒ ॥

Mantra without Swara
उत सखास्यश्विनोरुत माता गवामसि। उतोषो वस्व ईशिषे ॥

उत। सखा। असि। अश्विनोः। उत। माता। गवाम्। असि। उत। उषः। वस्वः। ईशिषे ॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 3 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (उषः) प्रातर्वेला के सदृश वर्त्तमान सुन्दर स्त्री ! तू अपने पति की (सखा) सखी के सदृश वर्त्तमान (असि) है (उत) और (अश्विनोः) सूर्य्य और चन्द्रमा के सदृश अध्यापक और उपदेशक की सखी (असि) है (उत) और (गवाम्) किरण वा गौओं की (माता) माता (उत) और (वस्वः) धन की (ईशिषे) इच्छा करती है ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। वही स्त्री सुख देनेवाली जो मित्र के सदृश आज्ञा मानने और सेवा करनेवाली है, वही प्रातर्वेला के सदृश कुल की प्रकाशिका होती है ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥