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Rigveda Mandal 4 / Sukta 52 / Mantra 2

58 Sukta
7 Mantra
4/52/2
Devata- उषाः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अश्वे॑व चि॒त्रारु॑षी मा॒ता गवा॑मृ॒ताव॑री। सखा॑भूद॒श्विनो॑रु॒षाः ॥२॥

अश्वा॑ऽइव । चि॒त्रा । अरु॑षी । मा॒ता । गवा॑म् । ऋ॒तऽव॑री । सखा॑ । अ॒भू॒त् । अ॒श्विनोः॑ । उ॒षाः ॥

Mantra without Swara
अश्वेव चित्रारुषी माता गवामृतावरी। सखाभूदश्विनोरुषाः ॥

अश्वाऽइव। चित्रा। अरुषी। माता। गवाम्। ऋतऽवरी। सखा। अभूत्। अश्विनोः। उषाः ॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 3 Mantra » 2

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Meaning
हे मनुष्यो ! जो (चित्रा) अद्भुत गुण, कर्म और स्वभावयुक्त (अरुषी) ईषत् लाल वर्ण (ऋतावरी) बहुत सत्य का प्रकाश करानेवाली (उषाः) प्रातर्वेला (अश्वेव) घोड़ी के सदृश वर्त्तमान (अश्विनोः) सूर्य और चन्द्रमा की (सखा) मित्र (अभूत्) हुई वह (गवाम्) किरणों की (माता) माता के सदृश पालन करनेवाली जाननी चाहिये ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे मनुष्यो ! जो माता और मित्र के सदृश वर्त्तमान प्रातर्वेला है, वह युक्ति से सब पुरुषों से सेवन करने योग्य है ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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