Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 5 / Mantra 3

58 Sukta
15 Mantra
4/5/3
Devata- वैश्वानरः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
साम॑ द्वि॒बर्हा॒ महि॑ ति॒ग्मभृ॑ष्टिः स॒हस्र॑रेता वृष॒भस्तुवि॑ष्मान्। प॒दं न गोरप॑गूळ्हं विवि॒द्वान॒ग्निर्मह्यं॒ प्रेदु॑ वोचन्मनी॒षाम् ॥३॥

साम॑ । द्वि॒ऽबर्हाः॑ । महि॑ । ति॒ग्मऽभृ॑ष्टिः । स॒हस्र॑ऽरेताः । वृ॒ष॒भः । तुवि॑ष्मान् । प॒दम् । न । गोः । अप॑ऽगूळ्हम् । वि॒वि॒द्वान् । अ॒ग्निः । मह्य॑म् । प्र । इत् । ऊँ॒ इति॑ । वो॒च॒त् । म॒नी॒षाम् ॥

Mantra without Swara
साम द्विबर्हा महि तिग्मभृष्टिः सहस्ररेता वृषभस्तुविष्मान्। पदं न गोरपगूळ्हं विविद्वानग्निर्मह्यं प्रेदु वोचन्मनीषाम् ॥

साम। द्विऽबर्हाः। महि। तिग्मऽभृष्टिः। सहस्रऽरेताः। वृषभः। तुविष्मान्। पदम्। न। गोः। अपगूळ्हम्। विविद्वान्। अग्निः। मह्यम्। प्र। इत्। ऊम् इति। वोचत्। मनीषाम्॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 1 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (द्विबर्हाः) दो अर्थात् विद्या और विनय से वृद्ध (तिग्मभृष्टिः) तीव्र परिपाक जिसका ऐसा (सहस्ररेताः) परिमाण रहित पराक्रमयुक्त (वृषभः) बैल के सदृश श्रेष्ठ (तुविष्मान्) बहुत बलयुक्त (अग्निः) अग्नि के सदृश तेजस्वी और (विविद्वान्) विशेष करके पण्डित (गोः) गौ के (अपगूळ्हम्) गुप्त (पदम्) पैरों के चिह्न के (न) सदृश (मह्यम्) मुझ जानने की इच्छा करनेवाले के लिये (मनीषाम्) बुद्धि और (महि) बड़े (साम) सिद्धान्तित कर्म को (प्र, वोचत्) कहे (इत्, उ) फिर वही हम लोगों से सत्कार करने योग्य है ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। वही श्रेष्ठ विद्वान् है कि जो सब के लिये यथार्थज्ञान करावे। जैसे गौ के पैरों के चिह्न को खोज के गौ को प्राप्त होता है, वैसे ही पदार्थविद्या प्राप्त करने योग्य है ॥३॥
Subject
अब मेधावी पुरुष को क्या करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥