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Rigveda Mandal 4 / Sukta 5 / Mantra 14

58 Sukta
15 Mantra
4/5/14
Devata- वैश्वानरः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अ॒नि॒रेण॒ वच॑सा फ॒ल्ग्वे॑न प्र॒तीत्ये॑न कृ॒धुना॑तृ॒पासः॑। अधा॒ ते अ॑ग्ने॒ किमि॒हा व॑दन्त्यनायु॒धास॒ आस॑ता सचन्ताम् ॥१४॥

अ॒नि॒रेण॑ । वच॑सा । फ॒ल्ग्वे॑न । प्र॒तीत्ये॑न । कृ॒धुना॑ । अ॒तृ॒पासः॑ । अध॑ । ते । अ॒ग्ने॒ । किम् । इ॒ह । व॒द॒न्ति॒ । अ॒ना॒यु॒धासः॑ । आस॑ता । स॒च॒न्ता॒म् ॥

Mantra without Swara
अनिरेण वचसा फल्ग्वेन प्रतीत्येन कृधुनातृपासः। अधा ते अग्ने किमिहा वदन्त्यनायुधास आसता सचन्ताम् ॥

अनिरेण। वचसा। फल्ग्वेन। प्रतीत्येन। कृधुना। अतृपासः। अध। ते। अग्ने। किम्। इह। वदन्ति। अनायुधासः। असता। सचन्ताम्॥१४॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 3 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वान् पुरुष ! जो (अनिरेण) नहीं रमने योग्य (प्रतीत्येन) प्रतीति में प्रसिद्ध हुए (फल्ग्वेन) बड़े (कृधुना) छोटे (वचसा) वचन से (अतृपासः) अतृप्त होते हुए (आसता) नहीं वर्त्तमान बल आदि से (अनायुधासः) विना शस्त्र-अस्त्रवालों के सदृश (इह) इस संसार वा इस जन्म में (किम्) क्या (वदन्ति) कहते हैं (अध) इसके अनन्तर (ते) आपके लिये किसे (सचन्ताम्) प्राप्त होवें, इसका उत्तर कहिये ॥१४॥
Essence
जो श्रोता लोग उपदेश से उत्तर को प्राप्त हुए सन्तुष्ट न होवें, वे तब तक पूछें, जब कि समाधान को प्राप्त होवें, तब उस कर्म का आरम्भ करें ॥१४॥
Subject
अब समाधाता के विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥