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Rigveda Mandal 4 / Sukta 5 / Mantra 13

58 Sukta
15 Mantra
4/5/13
Devata- वैश्वानरः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
का म॒र्यादा॑ व॒युना॒ कद्ध॑ वा॒ममच्छा॑ गमेम र॒घवो॒ न वाज॑म्। क॒दा नो॑ दे॒वीर॒मृत॑स्य॒ पत्नीः॒ सूरो॒ वर्णे॑न ततनन्नु॒षासः॑ ॥१३॥

का । म॒र्यादा॑ । व॒युना॑ । कत् । ह॒ । वा॒मम् । अच्छ॑ । ग॒मे॒म॒ । र॒घवः॑ । न । वाज॑म् । क॒दा । नः॒ । दे॒वीः । अ॒मृत॑स्य । पत्नीः॑ । सूरः॑ । वर्णे॑न । त॒त॒न॒न् । उ॒षसः॑ ॥

Mantra without Swara
का मर्यादा वयुना कद्ध वाममच्छा गमेम रघवो न वाजम्। कदा नो देवीरमृतस्य पत्नीः सूरो वर्णेन ततनन्नुषासः ॥

का। मर्यादा। वयुना। कत्। ह। वामम्। अच्छ। गमेम। रघवः। न। वाजम्। कदा। नः। देवीः। अमृतस्य। पत्नीः। सूरः। वर्णेन। ततनन्। उषसः॥१३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 3 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (नः) हम लोगों की (का) कौन (मर्य्यादा) प्रतिष्ठा और कौन (वयुना) कर्म्म हम लोग (रघवः) शीघ्र करनेवालों के (वाजम्) विज्ञान और (वामम्) उत्तम वस्तु को (कत् ह) कभी (अच्छ) उत्तम प्रकार (गमेम) प्राप्त होवें और (कदा) कब (सूरः) सूर्य्य (अमृतस्य) नाशरहित काल की (देवीः) प्रकाशमान (पत्नीः) स्त्रियों के सदृश वर्त्तमान (उषासः) प्रातर्वेलाओं के (न) सदृश आप (वर्णेन) तेज से (ततनन्) विस्तृत करेंगे ॥१३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। मनुष्य लोग यथार्थवादी विद्वान् से मनुष्य के करने योग्य कर्म्मों और प्राप्त होने योग्य स्थान को पूछें कि आप सूर्य्य में प्रातःकाल के सदृश हम लोगों को कब विद्वान् करोगे? ऐसा पूछें ॥१३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥