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Rigveda Mandal 4 / Sukta 49 / Mantra 3

58 Sukta
6 Mantra
4/49/3
Devata- इन्द्राबृहस्पती Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ न॑ इन्द्राबृहस्पती गृ॒हमिन्द्र॑श्च गच्छतम्। सो॒म॒पा सोम॑पीतये ॥३॥

आ । नः॒ । इ॒न्द्रा॒बृ॒ह॒स्प॒ती॒ इति॑ । गृ॒हम् । इन्द्रः॑ । च॒ । ग॒च्छ॒त॒म् । सो॒म॒ऽपा । सोम॑ऽपीतये ॥

Mantra without Swara
आ न इन्द्राबृहस्पती गृहमिन्द्रश्च गच्छतम्। सोमपा सोमपीतये ॥

आ। नः। इन्द्राबृहस्पती इति। गृहम्। इन्द्रः। च। गच्छतम्। सोमऽपा। सोमऽपीतये ॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 25 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सोमपा) सोमलता के रस को पीनेवाले (इन्द्राबृहस्पती) राजा और अध्यापक आप दोनों (नः) हम लोगों के (गृहम्) घर को (सोमपीतये) सोमलता के उत्तम रस पीने के लिये (आ, गच्छतम्) आओ (इन्द्रः) और ऐश्वर्य्यवाला जन (च) भी आवे ॥३॥
Essence
हे राजा, मन्त्री और धनी जनो ! जैसे हम लोग आप लोगों को निमन्त्रण देकर अन्न आदि से सत्कार करें, वैसे ही आप हम लोगों का सत्कार करो ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥