Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 46 / Mantra 5

58 Sukta
7 Mantra
4/46/5
Devata- इन्द्रवायू Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
रथे॑न पृथु॒पाज॑सा दा॒श्वांस॒मुप॑ गच्छतम्। इन्द्र॑वायू इ॒हा ग॑तम् ॥५॥

रथे॑न । पृ॒थु॒ऽपाज॑सा । दा॒श्वांस॑म् । उप॑ । ग॒च्छ॒त॒म् । इन्द्र॑वायू॒ इति॑ । इ॒ह । आ । ग॒त॒म् ॥

Mantra without Swara
रथेन पृथुपाजसा दाश्वांसमुप गच्छतम्। इन्द्रवायू इहा गतम् ॥

रथेन। पृथुऽपाजसा। दाश्वांसम्। उप। गच्छतम्। इन्द्रवायू इति। इह। आ। गतम् ॥५॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 22 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्रवायू) वायु और बिजुलीरूप अग्नि के सदृश प्रतापी राजा और सेना के ईश जनो ! आप दोनों (पृथुपाजसा) विस्तीर्ण बलयुक्त (रथेन) रमणीय वाहन से (इह) इस संग्राम में (आ, गतम्) आओ और (दाश्वासंम्) दाता जन के (उप, गच्छतम्) समीप प्राप्त होओ ॥५॥
Essence
जैसे वायु और बिजुली बड़े प्रताप से युक्त वर्त्तमान हैं, वैसे ही राजा और मन्त्रीजन होवें ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥