Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 45 / Mantra 6

58 Sukta
7 Mantra
4/45/6
Devata- अश्विनौ Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
आ॒के॒नि॒पासो॒ अह॑भि॒र्दवि॑ध्वतः॒ स्व१॒॑र्ण शु॒क्रं त॒न्वन्त॒ आ रजः॑। सूर॑श्चि॒दश्वा॑न्युयुजा॒न ई॑यते॒ विश्वाँ॒ अनु॑ स्व॒धया॑ चेतथस्प॒थः ॥६॥

आ॒के॒ऽनि॒पासः॑ । अह॑ऽभिः । दवि॑ध्वतः । स्वः॑ । न । शु॒क्रम् । त॒न्वन्तः॑ । आ । रजः॑ । सूरः॑ । चि॒त् । अश्वा॑न् । यु॒यु॒जा॒नः । ई॒य॒ते॒ । विश्वा॑न् । अनु॑ । स्व॒धया॑ । चे॒त॒थः॒ । प॒थः ॥

Mantra without Swara
आकेनिपासो अहभिर्दविध्वतः स्व१र्ण शुक्रं तन्वन्त आ रजः। सूरश्चिदश्वान्युयुजान ईयते विश्वाँ अनु स्वधया चेतथस्पथः ॥

आकेऽनिपासः। अहऽभिः। दविध्वतः। स्वः। न। शुक्रम्। तन्वन्तः। आ। रजः। सूरः। चित्। अश्वान्। युयुजानः। ईयते। विश्वान्। अनु। स्वधया। चेतथः। पथः ॥६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 21 Mantra » 6

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे क्रियाओं में कुशल वाहनों के बनाने और चलानेवाले ! आप दोनों जैसे (अहभिः) दिनों से (दविध्वतः) पदार्थों का नाश करती हुईं (आकेनिपासः) समीप में अत्यन्त पालन करनेवाली किरणें (शुक्रम्) जल और (रजः) लोक को (आ, तन्वतः) विस्तारयुक्त करते हुए (स्वः) सूर्य्य के (न) सदृश प्रकाशित होते हैं वा जैसे कोई (सूरः) सूर्य्य (चित्) भी (अश्वान्) शीघ्र चलनेवाले किरणों को (युयुजानः) युक्त करता (ईयते) प्राप्त होता है, वैसे आप दोनों (स्वधया) अन्न आदि से (विश्वान्) सम्पूर्ण पदार्थों को जान के (पथः) मार्गों को (अनु, चेतथः) अनुकूल जनाते हो ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। हे मनुष्यो ! जो आप लोग किरणों और सूर्य्य के सदृश वाहनों में अग्नि से जल को विस्तारो तो जल, स्थल और आकाशमार्गों को सुख से जाओ ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥