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Rigveda Mandal 4 / Sukta 44 / Mantra 7

58 Sukta
7 Mantra
4/44/7
Devata- अश्विनौ Rishi- पुरुमीळहाजमीळहौ सौहोत्रौ Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
इ॒हेह॒ यद्वां॑ सम॒ना प॑पृ॒क्षे सेयम॒स्मे सु॑म॒तिर्वा॑जरत्ना। उ॒रु॒ष्यतं॑ जरि॒तारं॑ यु॒वं ह॑ श्रि॒तः कामो॑ नासत्या युव॒द्रिक् ॥७॥

इ॒हऽइ॑ह । यत् । वा॒म् । स॒म॒ना । प॒पृ॒क्षे । सा । इ॒यम् । अ॒स्मे इति॑ । सु॒ऽम॒तिः । वा॒ज॒ऽर॒त्ना॒ । उ॒रु॒ष्यत॑म् । ज॒रि॒तार॑म् । यु॒वम् । ह॒ । श्रि॒तः । कामः॑ । ना॒स॒त्या॒ । यु॒व॒द्रिक् ॥

Mantra without Swara
इहेह यद्वां समना पपृक्षे सेयमस्मे सुमतिर्वाजरत्ना। उरुष्यतं जरितारं युवं ह श्रितः कामो नासत्या युवद्रिक् ॥

इहऽइह। यत्। वाम्। समना। पपृक्षे। सा। इयम्। अस्मे इति। सुऽमतिः। वाजरत्ना। उरुष्यतम्। जरितारम्। युवम्। ह। श्रितः। कामः। नासत्या। युवद्रिक् ॥७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 20 Mantra » 7

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नासत्या) धर्मात्मा अध्यापक और उपदेशक जनो ! (इहेह) इस संसार में (वाम्) आप दोनों की (यत्) जो (समना) शान्ति आदि गुणों से युक्त (वाजरत्ना) विज्ञान रूप धन की प्राप्ति सिद्ध करनेवाली (सुमतिः) श्रेष्ठ मति है (सा) सो (इयम्) यह (अस्मे) हम लोगों को (पपृक्षे) सम्बन्धयुक्त करे जो यह और (युवद्रिक्) आप दोनों को प्राप्त करानेवाला (कामः) मनोरथ (जरिताम्) सम्पूर्ण विद्याओं के स्तुति करनेवाले को (श्रितः) आश्रित है (ह) उसी का (युवम्) आप (उरुष्यतम्) सेवन करें ॥७॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये सदा इस संसार में यथार्थवक्ता पुरुषों की बुद्धि की इच्छा करें और सत्य की कामना करें, जिससे सम्पूर्ण इच्छा पूर्ण होवे ॥७॥ इस सूक्त में अध्यापक, उपदेशक, राजा, अमात्य और सज्जन के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ की पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥७॥ यह चवालीसवाँ सूक्त और बीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
अब सज्जन विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥