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Rigveda Mandal 4 / Sukta 44 / Mantra 6

58 Sukta
7 Mantra
4/44/6
Devata- अश्विनौ Rishi- पुरुमीळहाजमीळहौ सौहोत्रौ Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नू नो॑ र॒यिं पु॑रु॒वीरं॑ बृ॒हन्तं॒ दस्रा॒ मिमा॑थामु॒भये॑ष्व॒स्मे। नरो॒ यद्वा॑मश्विना॒ स्तोम॒माव॑न्त्स॒धस्तु॑तिमाजमी॒ळ्हासो॑ अग्मन् ॥६॥

नु । नः॒ । र॒यिम् । पु॒रु॒ऽवीर॑म् । बृ॒हन्त॑म् । द॒स्रा॒ । मिमा॑थाम् । उ॒भये॑षु । अ॒स्मे इति॑ । नरः॑ । यत् । वा॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ । स्तोम॑म् । आव॑न् । स॒धऽस्तु॑तिम् । आ॒ज॒ऽमी॒ळ्हासः॑ । अ॒ग्म॒न् ॥

Mantra without Swara
नू नो रयिं पुरुवीरं बृहन्तं दस्रा मिमाथामुभयेष्वस्मे। नरो यद्वामश्विना स्तोममावन्त्सधस्तुतिमाजमीळ्हासो अग्मन् ॥

नु। नः। रयिम्। पुरुऽवीरम्। बृहन्तम्। दस्रा। मिमाथाम्। उभयेषु। अस्मे इति। नरः। यत्। वाम्। अश्विना। स्तोमम्। आवन्। सधऽस्तुतिम्। आजऽमीळ्हासः। अग्मन् ॥६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 20 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
हे (दस्रा) दुःख के नाश करनेवाले (अश्विना) सूर्य्य और चन्द्रमा के सदृश श्रेष्ठ गुणों से युक्त (यत्) जो (आजमीळ्हासः) बकरों को विद्या से सिञ्चन करनेवालों के पुत्र (नरः) नायकजन ! (वाम्) आप दोनों को और (सधस्तुतिम्) साथ कीर्त्ति को (अग्मन्) प्राप्त होते और (स्तोमम्) प्रशंसा को (आवन्) हम प्राप्त होते हैं उन (नः) हम सब लोगों के लिये आप दोनों (पुरुवीरम्) बहुत वीर हों जिससे उस (बृहन्तम्) बड़े (रयिम्) धन को (मिमाथाम्) धारण करो जिससे (उभयेषु) दोनों राजा और प्रजा जनों में (अस्मे) हम लोगों में लक्ष्मी (नु) शीघ्र बढ़े ॥६॥
Essence
हे राजन् और मुख्य मन्त्रीजनो ! आप दोनों सूर्य्य और चन्द्रमा के सदृश हम लोगों में वर्त्ताव कीजिये और बहुत लक्ष्मी को स्थापित कीजिये, जिससे हम लोग धन से युक्त होवें ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥