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Rigveda Mandal 4 / Sukta 43 / Mantra 2

58 Sukta
7 Mantra
4/43/2
Devata- अश्विनौ Rishi- पुरुमीळहाजमीळहौ सौहोत्रौ Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
को मृ॑ळाति कत॒म आग॑मिष्ठो दे॒वाना॑मु कत॒मः शंभ॑विष्ठः। रथं॒ कमा॑हुर्द्र॒वद॑श्वमा॒शुं यं सूर्य॑स्य दुहि॒तावृ॑णीत ॥२॥

कः । मृ॒ळा॒ति॒ । क॒त॒मः । आऽग॑मिष्ठः । दे॒वाना॑म् । ऊँ॒ इति॑ क॒त॒मः । शम्ऽभ॑विष्ठः । रथ॑म् । कम् । आ॒हुः॒ । द्र॒वत्ऽअ॑श्वम् । आ॒शुम् । यम् । सूर्य॑स्य । दु॒हि॒ता । अवृ॑णीत ॥

Mantra without Swara
को मृळाति कतम आगमिष्ठो देवानामु कतमः शंभविष्ठः। रथं कमाहुर्द्रवदश्वमाशुं यं सूर्यस्य दुहितावृणीत ॥

कः। मृळाति। कतमः। आऽगमिष्ठः। देवानाम्। ऊम् इति । कतमः। शम्ऽभविष्ठः। रथम्। कम्। आहुः। द्रवत्ऽअश्वम्। आशुम्। यम्। सूर्यस्य। दुहिता। अवृणीत ॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 19 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
(कः) कौन (देवानाम्) विद्वानों के बीच वा पृथिव्यादिकों में (मृळाति) सुख देता है (कतमः) कौनसा (आगमिष्ठः) अत्यन्त आनेवाला (उ) और (कतमः) कौनसा (शम्भविष्ठः) अत्यन्त कल्याण करनेवाला विद्वान् (कम्) किस (द्रवदश्वम्) शीघ्र चलनेवाले घोड़ों से युक्त (आशुम्) शीघ्रगामी (रथम्) रमण करने योग्य वाहन को (आहुः) कहते हैं (यम्) जिसको (सूर्य्यस्य) सूर्य्य की (दुहिता) कन्या के सदृश कान्ति (अवृणीत) स्वीकार करती है ॥२॥
Essence
हे विद्वानो ! हम लोग किस सुखकारक निरन्तर आनेवाले उत्तम प्रकार कल्याणकारक पदार्थ तथा अग्नि और जल के द्वारा चलनेवाले वाहन को उत्तम प्रकार जानें, इस प्रकार दो मन्त्रों में कहे हुए प्रश्नों के ये उत्तर हैं। जो जैसे प्रातर्वेला उषा सूर्य्य को वैसे अध्यापक से सुनता, वायु के सदृश विद्या का सेवन करता है और पतिव्रता स्त्री के सदृश विद्यायुक्त स्त्री प्रशंसा के योग्य पति को स्वीकार करती है, जो परोपकारी है, वह सुख करनेवाला, बिजुली अतीव आनेवाली, परमेश्वर अत्यन्त कल्याण करनेवाला, विद्वानों के मध्य में विद्वान्, जल-अग्नि के कलाकौशल से चलाया गया विमान आदि यान प्रशंसा के योग्य होता है, ऐसा जानो ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥