Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 42 / Mantra 8

58 Sukta
10 Mantra
4/42/8
Devata- इन्द्रावरुणौ Rishi- त्रसदस्युः पौरुकुत्स्यः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒स्माक॒मत्र॑ पि॒तर॒स्त आ॑सन्त्स॒प्त ऋष॑यो दौर्ग॒हे ब॒ध्यमा॑ने। त आय॑जन्त त्र॒सद॑स्युमस्या॒ इन्द्रं॒ न वृ॑त्र॒तुर॑मर्धदे॒वम् ॥८॥

अ॒स्माक॑म् । अत्र॑ । पि॒तरः॑ । ते । आ॒स॒न् । स॒प्त । ऋष॑यः । दौः॒ऽग॒हे । ब॒ध्यमा॑ने । ते । आ । अ॒य॒ज॒न्त॒ । त्र॒सद॑स्युम् । अ॒स्याः॒ । इन्द्र॑म् । न । वृ॒त्र॒ऽतुर॑म् । अ॒र्ध॒ऽदे॒वम् ॥

Mantra without Swara
अस्माकमत्र पितरस्त आसन्त्सप्त ऋषयो दौर्गहे बध्यमाने। त आयजन्त त्रसदस्युमस्या इन्द्रं न वृत्रतुरमर्धदेवम् ॥

अस्माकम्। अत्र। पितरः। ते। आसन्। सप्त। ऋषयः। दौःऽगहे। बध्यमाने। ते। आ। अयजन्त। त्रसदस्युम्। अस्याः। इन्द्रम्। न। वृत्रऽतुरम्। अर्धऽदेवम् ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 18 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे जगदीश्वर आपकी कृपा से (अत्र) जो इस संसार में (अस्माकम्) हम लोगों के (सप्त) छः ऋतु और सातवाँ वायु (ऋषयः) प्राप्त हुए (पितरः) पालन करनेवाले (आसन्) हैं (ते) वे (दौर्गहे) अत्यन्त गहन (बध्यमाने) ताड़ना दिये जाते हुए में (वृत्रतुरम्) जो मेघ वा धन की शीघ्रता कराता है उस (अर्द्धदेवम्) देव के आधे जगत् के देव को (इन्द्रम्) सूर्य्य के (न) सदृश तथा (अस्याः) इस सृष्टि के मध्य में (त्रसदस्युम्) दुष्ट डाकू जिससे डरते हैं, उसको (आ, अयजन्त) सब प्रकार मिलते हैं (ते) वे हमारे सुख के करनेवाले हों ॥८॥
Essence
हे मनुष्यो ! जिस जगदीश्वर ने सब के रक्षण के लिये ऋतु आदि पदार्थ रचे, उसकी उपासना करके दुःख से जीतने योग्य दुःख को जीतो ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.