Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 41 / Mantra 7

58 Sukta
11 Mantra
4/41/7
Devata- इन्द्रावरुणौ Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
यु॒वामिद्ध्यव॑से पू॒र्व्याय॒ परि॒ प्रभू॑ती ग॒विषः॑ स्वापी। वृ॒णी॒महे॑ स॒ख्याय॑ प्रि॒याय॒ शूरा॒ मंहि॑ष्ठा पि॒तरे॑व शं॒भू ॥७॥

यु॒वाम् । इत् । हि । अव॑से । पू॒र्व्याय॑ । परि॑ । प्रभू॑ती॒ इति॒ प्रऽभू॑ती । गो॒ऽइषः॑ । स्वा॒पी॒ इति॑ सुऽआपी । वृ॒णी॒महे॑ । स॒ख्याय॑ । प्रि॒याय॑ । शूरा॑ । मंहि॑ष्ठा । पि॒तरा॑ऽइव । श॒म्भू इति॑ श॒म्ऽभू ॥

Mantra without Swara
युवामिद्ध्यवसे पूर्व्याय परि प्रभूती गविषः स्वापी। वृणीमहे सख्याय प्रियाय शूरा मंहिष्ठा पितरेव शंभू ॥

युवाम्। इत्। हि। अवसे। पूर्व्याय। परि। प्रभूती इति प्रऽभूती। गोऽइषः। स्वापी इति सुऽआपी। वृणीमहे। सख्याय। प्रियाय। शूरा। मंहिष्ठा। पितराऽइव। शम्भू इति शम्ऽभू ॥७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 16 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे राजा और मन्त्रीजनो ! (युवाम्) तुम दोनों (हि) ही को (पूर्व्याय) पूर्व राजाओं ने किये (अवसे) रक्षण आदि के लिये (इत्) ही (प्रभूती) समर्थ (स्वापी) शयन करते हुए (शूरा) भयरहित और शत्रुओं के नाश करनेवाले (मंहिष्ठा) अत्यन्त सत्कार करने योग्य (पितरेव) जैसे पिता और माता, वैसे (शम्भू) सुख को हुवानेवाले =करनेवाले (प्रियाय) सुन्दर (सख्याय) मित्रपन के लिये (गविषः) गौओं की इच्छा करनेवाले का हम लोग (परि, वृणीमहे) स्वीकार करते हैं, इससे आप दोनों हम लोगों के पालन करनेवाले निरन्तर होवें ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे प्रजाजनो ! आप लोग उन्हीं राजा आदिकों को स्वीकार करो कि जो पिता के सदृश सब लोगों के पालन करने को समर्थ होवें ॥७॥
Subject
अब प्रजा विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.