Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 41 / Mantra 6

58 Sukta
11 Mantra
4/41/6
Devata- इन्द्रावरुणौ Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
तो॒के हि॒ते तन॑य उ॒र्वरा॑सु॒ सूरो॒ दृशी॑के॒ वृष॑णश्च॒ पौंस्ये॑। इन्द्रा॑ नो॒ अत्र॒ वरु॑णा स्याता॒मवो॑भिर्द॒स्मा परि॑तक्म्यायाम् ॥६॥

तो॒के । हि॒ते । तन॑ये । उ॒र्वरा॑सु । सूरः॑ । दृशी॑के । वृष॑णः । च॒ । पौंस्ये॑ । इन्द्रा॑ । नः॒ । अत्र॑ । वरु॑णा । स्या॒ता॒म् । अवः॑ऽभिः । द॒स्मा । परि॑ऽतक्म्यायाम् ॥

Mantra without Swara
तोके हिते तनय उर्वरासु सूरो दृशीके वृषणश्च पौंस्ये। इन्द्रा नो अत्र वरुणा स्यातामवोभिर्दस्मा परितक्म्यायाम् ॥

तोके। हिते। तनये। उर्वरासु। सूरः। दृशीके। वृषणः। च। पौंस्ये। इन्द्रा। नः। अत्र। वरुणा। स्याताम्। अवःऽभिः। दस्मा। परिऽतक्म्यायाम् ॥६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 16 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्रा) ऐश्वर्य्य के देनेवाले राजन् (वरुणा) श्रेष्ठ मन्त्री ! आप दोनों (अत्र) इस प्रजा में (परितक्म्यायाम्) सब ओर से घोड़ा जिसमें उस राज्य में (च) और (उर्वरासु) भूमियों में (सूरः) सूर्य्य के सदृश (हिते) हित के सिद्ध करनेवाले (तोके) शीघ्र उत्पन्न हुए पुत्र (तनये) कुमार (दृशीके) और देखने योग्य (पौंस्ये) पुरुषार्थ के निमित्त (नः) हम लोगों को (वृषणः) बलयुक्त करें तथा (अवोभिः) रक्षा आदि से (दस्मा) दुःख के नाश करनेवाले (स्याताम्) होवें ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। राजपुरुष जैसे ब्रह्माण्ड में सूर्य्य, वैसे प्रजाओं में पिता के सदृश वर्त्ताव कर और चोरों का निवारण करके न्याय से प्रजाओं का पालन करें ॥६॥
Subject
अब राज विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥