Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 39 / Mantra 5

58 Sukta
6 Mantra
4/39/5
Devata- दध्रिकाः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
इन्द्र॑मि॒वेदु॒भये॒ वि ह्व॑यन्त उ॒दीरा॑णा य॒ज्ञमु॑पप्र॒यन्तः॑। द॒धि॒क्रामु॒ सूद॑नं॒ मर्त्या॑य द॒दथु॑र्मित्रावरुणा नो॒ अश्व॑म् ॥५॥

इन्द्र॑म्ऽइव । इत् । उ॒भये॑ । वि । ह्व॒य॒न्ते॒ । उ॒त्ऽईरा॑णाः । य॒ज्ञम् । उ॒प॒ऽप्र॒यन्तः॑ । द॒धि॒ऽक्राम् । ऊँ॒ इति॑ । सूद॑नम् । मर्त्या॑य । द॒दथुः॑ । मि॒त्रा॒व॒रु॒णा॒ । नः॒ । अश्व॑म् ॥

Mantra without Swara
इन्द्रमिवेदुभये वि ह्वयन्त उदीराणा यज्ञमुपप्रयन्तः। दधिक्रामु सूदनं मर्त्याय ददथुर्मित्रावरुणा नो अश्वम् ॥

इन्द्रम्ऽइव। इत्। उभये। वि। ह्वयन्ते। उत्ऽईराणाः। यज्ञम्। उपऽप्रयन्तः। दधिऽक्राम्। ऊम् इति। सूदनम्। मर्त्याय। ददथुः। मित्रावरुणा। नः। अश्वम् ॥५॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 13 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (मित्रावरुणा) प्राण और उदान वायु के सदृश राजा के प्रधान और मन्त्री जो (उदीराणाः) उत्तमता को प्राप्त (यज्ञम्) न्याय व्यवहार को (उपप्रयन्तः) प्राप्त होते हुए (उभये) राजा और प्रजाजन (मर्त्याय) अन्य मनुष्य और (नः) हम लोगों के लिये (दधिक्राम्) न्याय धारण करनेवालों की कामना करनेवाले (सूदनम्) जलादि बहने (अश्वम्) और शीघ्र सुख करनेवाले बोध की (वि) विशेष करके (ह्वयन्ते) प्रशंसा करें और उन उत्तम पदार्थों को (ददथुः) तुम देओ वे आप (इन्द्रमिव) बिजुली के सदृश (इत्, उ) ही कृतज्ञ होओ ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जो राजा और प्रजाजन पक्षपात से रहित, न्याययुक्त धर्म का आचरण करते हैं, वे शत्रुरहित हुए सब के प्रिय होते हैं ॥५॥
Subject
अब राजप्रजाकृत्य को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥