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Rigveda Mandal 4 / Sukta 38 / Mantra 8

58 Sukta
10 Mantra
4/38/8
Devata- दध्रिकाः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ॒त स्मा॑स्य तन्य॒तोरि॑व॒ द्योर्ऋ॑घाय॒तो अ॑भि॒युजो॑ भयन्ते। य॒दा स॒हस्र॑म॒भि षी॒मयो॑धीद्दु॒र्वर्तुः॑ स्मा भवति भी॒म ऋ॒ञ्जन् ॥८॥

उ॒त । स्म॒ । अ॒स्य॒ । त॒न्य॒तोःऽइ॑व । द्योः । ऋ॒घा॒य॒तः । अ॒भि॒ऽयुजः॑ । भ॒य॒न्ते॒ । य॒दा । स॒हस्र॑म् । अ॒भि । सी॒म् । अयो॑धीत् । दुः॒ऽवर्तुः॑ । स्म॒ । भ॒व॒ति॒ । भी॒मः । ऋ॒ञ्जन् ॥

Mantra without Swara
उत स्मास्य तन्यतोरिव द्योर्ऋघायतो अभियुजो भयन्ते। यदा सहस्रमभि षीमयोधीद्दुर्वर्तुः स्मा भवति भीम ऋञ्जन् ॥

उत। स्म। अस्य। तन्यतोःऽइव। द्योः। ऋघायतः। अभिऽयुजः। भयन्ते। यदा। सहस्रम्। अभि। सीम्। अयोधीत्। दुःऽर्वर्तुः। स्म। भवति। भीमः। ऋञ्जन् ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 12 Mantra » 3

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Meaning
हे मनुष्यो ! जो (स्म) ही (भीमः) भयंकर (ऋञ्जन्) विजय को प्रसिद्ध करता हुआ (भवति) होता है जो (यदा) जब (सहस्रम्) सङ्ख्यारहित (सीम्) सब प्रकार (अभि, अयोधीत्) युद्ध करता है (अस्य, स्म) इसी (दुर्वर्त्तुः) दुःख से वर्त्तमान (ऋघायतः) हिंसा करते हुए (उत) और (अभियुजः) अभियोग करते हुए के समीप से (द्योः) प्रकाशमान (तन्यतोरिव) बिजुली के सदृश सब लोग (भयन्ते) भय करते हैं, तभी राजा का प्रताप प्रवृत्त होता है ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जो राजा बिजुली के सदृश दुष्टों का नाश करके धार्मिकों का सत्कार करता है, वह एक भी संख्यारहित वीरों के साथ युद्ध करने योग्य होता है और जब वह राजा न्याय से प्रकट दण्ड देनेवाला होवे, तब सब दुष्ट जन डर के छिप जाते हैं ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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