Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 38 / Mantra 2

58 Sukta
10 Mantra
4/38/2
Devata- दध्रिकाः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ॒त वा॒जिनं॑ पुरुनि॒ष्षिध्वा॑नं दधि॒क्रामु॑ ददथुर्वि॒श्वकृ॑ष्टिम्। ऋ॒जि॒प्यं श्ये॒नं प्रु॑षि॒तप्सु॑मा॒शुं च॒र्कृत्य॑म॒र्यो नृ॒पतिं॒ न शूर॑म् ॥२॥

उ॒त । वा॒जिन॑म् । पु॒रु॒निः॒ऽसिध्वा॑नम् । द॒धि॒ऽक्राम् । ऊँ॒ इति॑ । द॒द॒थुः॒ । वि॒श्वऽकृ॑ष्टिम् । ऋ॒जि॒प्यम् । श्ये॒नम् । प्रु॒षि॒तऽप्सु॑म् । आ॒शुम् । च॒र्कृत्य॑म् । अ॒र्यः । नृ॒ऽपति॑म् । न । शूर॑म् ॥

Mantra without Swara
उत वाजिनं पुरुनिष्षिध्वानं दधिक्रामु ददथुर्विश्वकृष्टिम्। ऋजिप्यं श्येनं प्रुषितप्सुमाशुं चर्कृत्यमर्यो नृपतिं न शूरम् ॥

उत। वाजिनम्। पुरुनिःऽसिध्वानम्। दधिऽक्राम्। ऊम् इति। ददथुः। विश्वऽकृष्टिम्। ऋजिप्यम्। श्येनम्। प्रुषितऽप्सुम्। आशुम्। चर्कृत्यम्। अर्यः। नृऽपतिम्। न। शूरम् ॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 11 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे सभा और सेना के ईश ! आप दोनों जिसके लिये (अर्य्यः) स्वामी (शूरम्) वीर (नृपतिम्) मनुष्यों के पालन करनेवाले राजा के (न) सदृश (वाजिनम्) बहुत वेगयुक्त (पुरुनिष्षिध्वानम्) बहुत शत्रुओं के हरानेवाले (दधिक्राम्) धारण करनेवाली अधिकता के सहित वर्त्तमान (विश्वकृष्टिम्) सब मनुष्य जीतते जिससे उस (उत) और बहुत वेगवाले (उ) और (ऋजिप्यम्) सरलों के पालन करनेवालों में श्रेष्ठ (प्रुषितप्सुम्) जो श्रेष्ठ पदार्थों को भक्षण करनेवाले (श्येनम्) शीघ्रगामी वाज के सदृश (चर्कृत्यम्) निरन्तर करने के योग्य (आशुम्) पूर्ण मार्ग को व्याप्त होनेवाले को (ददथुः) देवें, वह विजय के लिये समर्थ होवे ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जो राजजन शिल्पविद्या से उत्पन्न शस्त्र-अस्त्र और उत्तम प्रकार शिक्षित चार अङ्गों से युक्त सेना को सिद्ध करें तो कहीं भी पराजय न होवे ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥