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Rigveda Mandal 4 / Sukta 37 / Mantra 7

58 Sukta
8 Mantra
4/37/7
Devata- ऋभवः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
वि नो॑ वाजा ऋभुक्षणः प॒थश्चि॑तन॒ यष्ट॑वे। अ॒स्मभ्यं॑ सूरयः स्तु॒ता विश्वा॒ आशा॑स्तरी॒षणि॑ ॥७॥

वि । नः॒ । वा॒जाः॒ । ऋ॒भु॒क्ष॒णः॒ । प॒थः । चि॒त॒न॒ । यष्ट॑वे । अ॒स्मभ्य॑म् । सू॒र॒यः॒ । स्तु॒ताः । विश्वाः॑ । आशाः॑ । त॒री॒षणि॑ ॥

Mantra without Swara
वि नो वाजा ऋभुक्षणः पथश्चितन यष्टवे। अस्मभ्यं सूरयः स्तुता विश्वा आशास्तरीषणि ॥

वि। नः। वाजाः। ऋभुक्षणः। पथः। चितन। यष्टवे। अस्मभ्यम्। सूरयः। स्तुताः। विश्वाः। आशाः। तरीषणि ॥७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 10 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वाजाः) प्रशंसित (ऋभुक्षणः) बड़े (स्तुताः) स्तुति किये गये (सूरयः) विद्वानो ! आप लोग (अस्मभ्यम्) हम लोगों के लिये (यष्टवे) मिलने को (पथः) मार्ग (वि, चितन) जनाइये जिससे (तरीषणि) दुःख के पार उतरने के सामर्थ्य को प्राप्त होकर (नः) हम लोगों की (विश्वाः) सम्पूर्ण (आशाः) इच्छाएँ पूर्ण होवें ॥७॥
Essence
जो मनुष्य बाल्यावस्था से लेकर विद्वानों की शिक्षा का ग्रहण करें, उनकी सम्पूर्ण इच्छा पूर्ण होवें ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥