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Rigveda Mandal 4 / Sukta 36 / Mantra 9

58 Sukta
9 Mantra
4/36/9
Devata- ऋभवः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
इ॒ह प्र॒जामि॒ह र॒यिं ररा॑णा इ॒ह श्रवो॑ वी॒रव॑त्तक्षता नः। येन॑ व॒यं चि॒तये॒मात्य॒न्यान्तं वाजं॑ चि॒त्रमृ॑भवो ददा नः ॥९॥

इ॒ह । प्र॒ऽजाम् । इ॒ह । र॒यिम् । ररा॑णाः । इ॒ह । श्रवः॑ । वी॒रऽव॑त् । त॒क्ष॒त॒ । नः॒ । येन॑ । व॒यम् । चि॒तये॑म । अति॑ । अ॒न्यान् । तम् । वाज॑म् । चि॒त्रम् । ऋ॒भ॒वः॒ । द॒द॒ । नः॒ ॥

Mantra without Swara
इह प्रजामिह रयिं रराणा इह श्रवो वीरवत्तक्षता नः। येन वयं चितयेमात्यन्यान्तं वाजं चित्रमृभवो ददा नः ॥

इह। प्रऽजाम्। इह। रयिम्। रराणाः। इह। श्रवः। वीरऽवत्। तक्षत। नः। येन। वयम्। चितयेम। अति। अन्यान्। तम्। वाजम्। चित्रम्। ऋभवः। दद। नः ॥९॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 8 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (ऋभवः) बुद्धिमानो ! आप लोग (इह) इस संसार में (नः) हम लोगों के लिये (प्रजाम्) उत्तम सन्तान वा राज्य को (इह) इस संसार में (रयिम्) धन को और (इह) इस संसार में (वीरवत्) प्रशंसा करने योग्य वीरों के करनेवाले (श्रवः) अन्न वा श्रवण को (रराणाः) देते हुए (तक्षत) प्राप्त कराओ (येन) जिससे (वयम्) हम लोग (अन्यान्) औरों के प्रति (अति, चितयेम) उत्तम रीति से विज्ञान को कहें (तम्) उस (चित्रम्) अद्भुत (वाजम्) विज्ञान को (नः) हम लोगों के लिये (ददा) दीजिये ॥९॥
Essence
जब मनुष्य विद्वानों को प्राप्त होवें तब विज्ञान, सत्यश्रवण, धन, उत्तम प्रजा और शूरवीरयुक्त सेना की याचना करें, उनसे यथार्थ विद्या को प्राप्त होकर अन्यों को निरन्तर बोध करावें ॥९॥ इस सूक्त में विपश्चित् के गुण कृत्य वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ की पिछिले सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥९॥ यह छत्तीसवाँ सूक्त और आठवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥