Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 34 / Mantra 9

58 Sukta
11 Mantra
4/34/9
Devata- ऋभवः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ये अ॒श्विना॒ ये पि॒तरा॒ य ऊ॒ती धे॒नुं त॑त॒क्षुर्ऋ॒भवो॒ ये अश्वा॑। ये अंस॑त्रा॒ य ऋध॒ग्रोद॑सी॒ ये विभ्वो॒ नरः॑ स्वप॒त्यानि॑ च॒क्रुः ॥९॥

ये । अ॒स्विना॑ । ये । पि॒तरा॑ । ये । ऊ॒ती । धे॒नुम् । त॒त॒क्षुः । ऋ॒भवः॑ । ये । अश्वा॑ । ये । अंस॑त्रा । य ऋध॑क् । रोद॑सी॒ इति॑ । ये । विऽभ्वः॑ । नरः॑ । सु॒ऽअ॒प॒त्यानि॑ । च॒क्रुः ॥

Mantra without Swara
ये अश्विना ये पितरा य ऊती धेनुं ततक्षुर्ऋभवो ये अश्वा। ये अंसत्रा य ऋधग्रोदसी ये विभ्वो नरः स्वपत्यानि चक्रुः ॥

ये। अश्विना। ये पितरा। ये। ऊती। धेनुम्। ततक्षुः। ऋभवः। ये। अश्वा। ये। अंसत्रा। ये। ऋधक्। रोदसी इति। ये। विऽभ्वः। नरः। सुऽअपत्यानि। चक्रुः ॥९॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 4 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(ये) जो (ऋभवः) बुद्धिमान् (अश्विना) सम्पूर्ण विद्याओं में व्याप्त (ये) जो (पितरा) सब प्रकार से पालन करनेवाले और (ये) जो (अश्वा) वेग से मार्ग के बीच व्याप्त होनेवाले दो पदार्थ (ये) (अंसत्रा) गमन आदि के रक्षक और (ये) जो (रोदसी) अन्तरिक्ष और पृथिवी और (ये) जो (विभ्वः) सम्पूर्ण विद्याओं में व्यापक (नरः) नायक मनुष्य और (ये) जो बुद्धिमान् (ऊती) रक्षण आदि से (धेनुम्) विद्यासहित वाणी को (ततक्षुः) सूक्ष्म और विस्तारयुक्त करते हैं और (स्वपत्यानि) उत्तम शिक्षा से सन्तानों को श्रेष्ठ (ऋधक्) यथार्थ भाव से (चक्रुः) करें, वे बड़े भाग्यशाली होवें ॥९॥
Essence
जो मनुष्य विद्या और सत्पुरुषों का संग, वृद्धों का सेवन और अपने समीप प्राप्तों की रक्षा करके अपने सन्तानों को श्रेष्ठ करें, वे विस्तारयुक्त सुख को प्राप्त होवें ॥९॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥