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Rigveda Mandal 4 / Sukta 34 / Mantra 5

58 Sukta
11 Mantra
4/34/5
Devata- ऋभवः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ वा॑जा या॒तोप॑ न ऋभुक्षा म॒हो न॑रो॒ द्रवि॑णसो गृणा॒नाः। आ वः॑ पी॒तयो॑ऽभिपि॒त्वे अह्ना॑मि॒मा अस्तं॑ नव॒स्व॑इव ग्मन् ॥५॥

आ । वा॒जाः॒ । या॒त॒ । उप॑ । नः॒ । ऋ॒भु॒क्षाः॒ । म॒हः । न॒रः॒ । द्रवि॑णसः । गृ॒णा॒नाः । आ । वः॒ । पी॒तयः॑ । अ॒भि॒ऽपि॒त्वे । अह्ना॑म् । इ॒माः । अस्त॑म् । न॒व॒स्वः॑ऽइव । ग्म॒न् ॥

Mantra without Swara
आ वाजा यातोप न ऋभुक्षा महो नरो द्रविणसो गृणानाः। आ वः पीतयोऽभिपित्वे अह्नामिमा अस्तं नवस्वइव ग्मन् ॥

आ। वाजाः। यात। उप। नः। ऋभुक्षाः। महः। नरः। द्रविणसः। गृणानाः। आ। वः। पीतयः। अभिऽपित्वे। अह्नाम्। इमाः। अस्तम्। नवस्वःऽइव। ग्मन् ॥५॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 3 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (ऋभुक्षाः) उत्तम गुणों से बड़े (वाजाः) ब्रह्मचर्य्य को प्राप्त (महः) आदर करने योग्य (नरः) नायक ! (द्रविणसः) यशरूप धन की (गृणानाः) स्तुति प्रशंसा करते हुए आप लोग (नः) हम लोगों के (उप, आ, यात) समीप प्राप्त हूजिये और (अह्नाम्) दिनों की (अभिपित्वे) प्राप्ति होने में (इमाः) यह प्रत्यक्ष (पीतयः) जो पान हैं वह (अस्तम्, नवस्वइव) जैसे नवीन सुखवाला घर को प्राप्त होता है, वैसे (वः) आपको (आ, ग्मन्) प्राप्त हों ॥५॥
Essence
सब मनुष्यों को चाहिये कि ऐसी इच्छा नित्य करें कि हम लोगों को यथार्थवक्ता विद्वान् लोग प्राप्त होवें और दिन-रात्रि ऐश्वर्य्य की प्राप्ति होवे। जैसे नवीन विवाहाश्रम का सेवन करते हैं, वैसे ही स्त्री और पुरुष गृह के कृत्यों का सेवन करें ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥