Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 32 / Mantra 8

58 Sukta
24 Mantra
4/32/8
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
न त्वा॑ वरन्ते अ॒न्यथा॒ यद्दित्स॑सि स्तु॒तो म॒घम्। स्तो॒तृभ्य॑ इन्द्र गिर्वणः ॥८॥

न । त्वा॒ । व॒र॒न्ते॒ । अ॒न्यथा॑ । यत् । दित्स॑सि । स्तु॒तः । म॒घम् । स्तो॒तृऽभ्यः॑ । इ॒न्द्र॒ । गि॒र्व॒णः॒ ॥

Mantra without Swara
न त्वा वरन्ते अन्यथा यद्दित्ससि स्तुतो मघम्। स्तोतृभ्य इन्द्र गिर्वणः ॥

न। त्वा। वरन्ते। अन्यथा। यत्। दित्ससि। स्तुतः। मघम्। स्तोतृऽभ्यः। इन्द्र। गिर्वणः ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 28 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (गिर्वणः) वाणियों से सत्कार को प्राप्त (इन्द्र) राजन् ! (यत्) जो (स्तुतः) प्रशंसा किये गये आप (स्तोतृभ्यः) विद्वानों के लिये (मघम्) धन को (दित्ससि) देने की इच्छा करते हो उन (त्वा) आपको (अन्यथा) अन्य प्रकार से मनुष्य (न) नहीं (वरन्ते) स्वीकार करते हैं ॥८॥
Essence
जो इस संसार में देनेवाला होता है, वही सब का प्रिय होता और कोई भी उसका विरोधी नहीं होता है ॥८॥
Subject
अब अध्यापक और उपदेशक के गुणों को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.