Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 32 / Mantra 6

58 Sukta
24 Mantra
4/32/6
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
भू॒यामो॒ षु त्वाव॑तः॒ सखा॑य इन्द्र॒ गोम॑तः। युजो॒ वाजा॑य॒ घृष्व॑ये ॥६॥

भू॒यामो॒ इति॑ । सु । त्वाऽव॑तः । सखा॑यः । इ॒न्द्र॒ । गोऽम॑तः । युजः॑ । वाजा॑य । घृष्व॑ये ॥

Mantra without Swara
भूयामो षु त्वावतः सखाय इन्द्र गोमतः। युजो वाजाय घृष्वये ॥

भूयामो इति। सु। त्वाऽवतः। सखायः। इन्द्र। गोऽमतः। युजः। वाजाय। घृष्वये ॥६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 28 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) राजन् ! (त्वावतः) आपसे रक्षित (सखायः) मित्र हम लोग (घृष्वये) घिसने और (वाजाय) विज्ञान वा अन्न के लिये (गोमतः) गौओं से युक्त (युजः) युक्त होनेवालों को प्राप्त होकर (सु) सुन्दर (भूयामो) होवें ॥६॥
Essence
हे राजन् ! जो आप पृथिवी आदि से युक्त हम लोगों को ऐश्वर्य्य के साथ युक्त करें तो हम लोग भी आपके साथ युक्त हों ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥