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Rigveda Mandal 4 / Sukta 32 / Mantra 21

58 Sukta
24 Mantra
4/32/21
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
भू॒रि॒दा ह्यसि॑ श्रु॒तः पु॑रु॒त्रा शू॑र वृत्रहन्। आ नो॑ भजस्व॒ राध॑सि ॥२१॥

भू॒रि॒ऽदाः । हि । असि॑ । श्रु॒तः । पु॒रु॒ऽत्रा । शू॒र॒ । वृ॒त्र॒ऽह॒न् । आ । नः॒ । भ॒ज॒स्व॒ । राध॑सि ॥

Mantra without Swara
भूरिदा ह्यसि श्रुतः पुरुत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि ॥

भूरिऽदाः। हि। असि। श्रुतः। पुरुऽत्रा। शूर। वृत्रऽहन्। आ। नः। भजस्व। राधसि ॥२१॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 30 Mantra » 5

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Meaning
हे (शूर) शत्रुओं के नाश करनेवाले (वृत्रहन्) धन को प्राप्त राजन् ! आप (हि) जिससे (भूरिदाः) बहुत देनेवाले (असि) हो इससे (पुरुत्रा) बहुतों में प्रतिष्ठित और (श्रुतः) सब जगह प्रसिद्ध यशवाले हो जिससे आप (नः) हम लोगों को (राधसि) अच्छे प्रकार साधते हैं, इससे हम लोगों को (आ, भजस्व) अच्छे प्रकार सेवो ॥२१॥
Essence
जो इस संसार में बहुत देनेवाला होता है, वही सम्पूर्ण दिशाओं में कीर्तियुक्त होता है ॥२१॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥