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Rigveda Mandal 4 / Sukta 32 / Mantra 20

58 Sukta
24 Mantra
4/32/20
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
भूरि॑दा॒ भूरि॑ देहि नो॒ मा द॒भ्रं भूर्या भ॑र। भूरि॒ घेदि॑न्द्र दित्ससि ॥२०॥

भूरि॑ऽदाः । भूरि॑ । दे॒हि॒ । नः॒ । मा । द॒भ्रम् । भूरि॑ । आ । भ॒र॒ । भूरि॑ । घ॒ । इत् । इ॒न्द्र॒ । दि॒त्स॒सि॒ ॥

Mantra without Swara
भूरिदा भूरि देहि नो मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि ॥

भूरिऽदाः। भूरि। देहि। नः। मा। दभ्रम्। भूरि। आ। भर। भूरि। घ। इत्। इन्द्र। दित्ससि ॥२०॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 30 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) देनेवाले ! जो आप (नः) हम लोगों के लिये (भूरि) बहुत (दित्ससि) देने की इच्छा करते हो वह (भूरिदाः) बहुत देनेवाले आप हम लोगों के लिये (भूरि) बहुत (देहि) दीजिये और (भूरि) बहुत को (आ, भर) सब प्रकार धारण कीजिये (दभ्रम्) थोड़े को (घ) ही (मा) मत दीजिये और थोड़े को (इत्) ही न धारण कीजिये ॥२०॥
Essence
जो बहुत देनेवाला है, वही प्रशंसा को प्राप्त होता है और जो थोड़ा देनेवाला, वह नहीं इस प्रकार प्रशंसित होता है ॥२०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥