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Rigveda Mandal 4 / Sukta 32 / Mantra 19

58 Sukta
24 Mantra
4/32/19
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
दश॑ ते क॒लशा॑नां॒ हिर॑ण्यानामधीमहि। भू॒रि॒दा अ॑सि वृत्रहन् ॥१९॥

दश॑ । ते॒ । क॒लशा॑नाम् । हिर॑ण्यानाम् । अ॒धी॒म॒हि॒ । भू॒रि॒ऽदाः । अ॒सि॒ । वृ॒त्र॒ऽह॒न् ॥

Mantra without Swara
दश ते कलशानां हिरण्यानामधीमहि। भूरिदा असि वृत्रहन् ॥

दश। ते। कलशानाम्। हिरण्यानाम्। अधीमहि। भूरिऽदाः। असि। वृत्रऽहन् ॥१९॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 30 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वृत्रहन्) शत्रुओं के नाश करनेवाले ! जिससे आप (भूरिदाः) बहुतों के देनेवाले (असि) हो इससे (ते) आपके (हिरण्यानाम्) सुवर्ण के बने हुए (कलशानाम्) घटों के (दश) दशसंख्यायुक्त समूह को हम लोग (अधीमहि) प्राप्त होवें ॥१९॥
Essence
जो मनुष्य बहुत देनेवाला होता है, उसके मित्र बहुत होते हैं ॥१९॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥