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Rigveda Mandal 4 / Sukta 32 / Mantra 18

58 Sukta
24 Mantra
4/32/18
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स॒हस्रा॑ ते श॒ता व॒यं गवा॒मा च्या॑वयामसि। अ॒स्म॒त्रा राध॑ एतु ते ॥१८॥

स॒हस्रा॑ । ते॒ । श॒ता । व॒यम् । गवा॑म् । आ । च्या॒व॒या॒म॒सि॒ । अ॒स्म॒ऽत्रा । राधः॑ । ए॒तु॒ । ते॒ ॥

Mantra without Swara
सहस्रा ते शता वयं गवामा च्यावयामसि। अस्मत्रा राध एतु ते ॥

सहस्रा। ते। शता। वयम्। गवाम्। आ। च्यावयामसि। अस्मऽत्रा। राधः। एतु। ते ॥१८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 30 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे धन के ईश (ते) आप का (राधः) धन (अस्मत्रा) हम लोगों में (एतु) प्राप्त हो और (ते) आपकी (गवाम्) गौ के (सहस्रा) हजारों और (शता) सैकड़ों समूह को (वयम्) हम लोग (आ, च्यावयामसि) प्राप्त कराते हैं ॥१८॥
Essence
हे धनाढ्य ! आपके समीप से हम लोग गौ आदि पदार्थों को प्राप्त होकर औरों के लिये देते हैं और हम लोगों का धन आपको प्राप्त हो ॥१८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥