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Rigveda Mandal 4 / Sukta 32 / Mantra 17

58 Sukta
24 Mantra
4/32/17
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- पादनिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स॒हस्रं॒ व्यती॑नां यु॒क्ताना॒मिन्द्र॑मीमहे। श॒तं सोम॑स्य खा॒र्यः॑ ॥१७॥

स॒हस्र॑म् । व्यती॑नाम् । यु॒क्ताना॑म् । इन्द्र॑म् । ई॒म॒हे॒ । श॒तम् । सोम॑स्य । खा॒र्यः॑ ॥

Mantra without Swara
सहस्रं व्यतीनां युक्तानामिन्द्रमीमहे। शतं सोमस्य खार्यः ॥

सहस्रम्। व्यतीनाम्। युक्तानाम्। इन्द्रम्। ईमहे। शतम्। सोमस्य। खार्यः ॥१७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 30 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे धनाढ्य पुरुष (व्यतीनाम्) गमन करनेवाले (युक्तानाम्) उत्तम प्रकार सावधान चित्त हुए जनों का (सहस्रम्) एक सहस्र और (सोमस्य) धान्य आदि ऐश्वर्य की (खार्यः, शतम्) सौ खारी अर्थात् सौ मन तुले हुए अन्न आदि पदार्थ हैं उनकी (इन्द्रम्) दुष्टों को नाश करनेवाले राजा को प्राप्त होकर (ईमहे) याचना करते हैं ॥१७॥
Essence
जो धनाढ्य जनों को प्राप्त होकर असङ्ख्य पदार्थों की याचना करते हैं, वे थोड़ा पाते हैं और जो याचना नहीं करते हैं, वे बहुत पाते हैं ॥१७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥