Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 31 / Mantra 7

58 Sukta
15 Mantra
4/31/7
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त स्मा॒ हि त्वामा॒हुरिन्म॒घवा॑नं शचीपते। दाता॑र॒मवि॑दीधयुम् ॥७॥

उ॒त । स्म॒ । हि । त्वाम् । आ॒हुः । इत् । म॒घऽवा॑नम् । श॒ची॒ऽप॒ते॒ । दाता॑रम् । अवि॑ऽदीधयुम् ॥

Mantra without Swara
उत स्मा हि त्वामाहुरिन्मघवानं शचीपते। दातारमविदीधयुम् ॥

उत। स्म। हि। त्वाम्। आहुः। इत्। मघऽवानम्। शचीऽपते। दातारम्। अविऽदीधयुम् ॥७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 25 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (शचीपते) वाणी और बुद्धि के पालन करनेवाले राजन् ! (हि) जिससे (त्वाम्) आपको (मघवानम्) अत्यन्त श्रेष्ठ बहुत धनवाले (अविदीधयुम्) जुआ आदि दुष्ट कर्म्मों से रहित (दातारम्) देनेवाला (स्म) ही विद्वान् लोग (आहुः) कहते हैं (उत) और सेवा भी करें, इससे (इत्) उन्हीं को हम लोग भी सेवें ॥७॥
Essence
हे विद्वानो ! जो आप लोग धर्म्मयुक्त कर्म्मों का आचरण करें तो आप लोगों में ऐश्वर्य्य और दानकर्म्म कभी न नष्ट होवें ॥७॥
Subject
फिर प्रतिज्ञा पालनेवाले राजप्रजाधर्मविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.