Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 31 / Mantra 6

58 Sukta
15 Mantra
4/31/6
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सं यत्त॑ इन्द्र म॒न्यवः॒ सं च॒क्राणि॑ दधन्वि॒रे। अध॒ त्वे अध॒ सूर्ये॑ ॥६॥

सम् । यत् । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । म॒न्यवः॑ । सम् । च॒क्राणि॑ । द॒ध॒न्वि॒रे । अध॑ । त्वे इति॑ । अध॑ । सूर्ये॑ ॥

Mantra without Swara
सं यत्त इन्द्र मन्यवः सं चक्राणि दधन्विरे। अध त्वे अध सूर्ये ॥

सम्। यत्। ते। इन्द्र। मन्यवः। सम्। चक्राणि। दधन्विरे। अध। त्वे इति। अध। सूर्ये ॥६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 25 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) जीव (ते) तेरे (यत्) जो (मन्यवः) क्रोध आदि व्यवहार (चक्राणि) चक्र के सदृश वर्तमान कर्म्मों को (सम्, दधन्विरे) धारण करते हैं (अध) अनन्तर (त्वे) आप में धन को धारण करते (अध) इसके अनन्तर वे (सूर्य्य) सूर्य्य में प्रकाश के सदृश प्रताप को (सम्) धारण करते हैं ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्य ! जो तू दुष्ट आचरण करनेवाले पर क्रोध और श्रेष्ठ आचरण करनेवाले के प्रति हर्ष करे तो सूर्य्य के सदृश प्रतापी होवे ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.