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Rigveda Mandal 4 / Sukta 31 / Mantra 12

58 Sukta
15 Mantra
4/31/12
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒स्माँ अ॑विड्ढि वि॒श्वहेन्द्र॑ रा॒या परी॑णसा। अ॒स्मान्विश्वा॑भिरू॒तिभिः॑ ॥१२॥

अ॒स्मान् । अ॒वि॒ड्ढि॒ । वि॒श्वऽहा॑ । इन्द्र॑ । रा॒या । परी॑णसा । अ॒स्मान् । विश्वा॑भिः । ऊ॒तिऽभिः॑ ॥

Mantra without Swara
अस्माँ अविड्ढि विश्वहेन्द्र राया परीणसा। अस्मान्विश्वाभिरूतिभिः ॥

अस्मान्। अविड्ढि। विश्वहा। इन्द्र। राया। परीणसा। अस्मान्। विश्वाभिः। ऊतिऽभिः ॥१२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 26 Mantra » 2

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Meaning
हे (इन्द्र) अत्यन्त ऐश्वर्य्य से युक्त राजन् ! आप (विश्वहा) सम्पूर्ण दिनों को (परीणसा) अनेक प्रकार के (राया) धन के साथ (अस्मान्) हम लोगों को (अविड्ढि) प्रवेश कराइये और (विश्वाभिः) सम्पूर्ण (ऊतिभिः) रक्षा आदि क्रियाओं से हम लोगों को प्रवेश कराईये अर्थात् युक्त करिये ॥१२॥
Essence
वही उत्तम राजा और राजपुरुष हैं कि जो सब प्रकार रक्षा से प्रजा को धनाढ्य करें ॥१२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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