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Rigveda Mandal 4 / Sukta 30 / Mantra 24

58 Sukta
24 Mantra
4/30/24
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
वा॒मंवा॑मं त आदुरे दे॒वो द॑दात्वर्य॒मा। वा॒मं पू॒षा वा॒मं भगो॑ वा॒मं दे॒वः करू॑ळती ॥२४॥

व॒मम्ऽवा॑मम् । ते॒ । आ॒ऽदु॒रे॒ । दे॒वः । द॒दा॒तु॒ । अ॒र्य॒मा । वा॒मम् । पू॒षा । वा॒मम् । भगः॑ । वा॒मम् । दे॒वः । करू॑ळती ॥

Mantra without Swara
वामंवामं त आदुरे देवो ददात्वर्यमा। वामं पूषा वामं भगो वामं देवः करूळती ॥

वामम्ऽवामम्। ते। आऽदुरे। देवः। ददातु। अर्यमा। वामम्। पूषा। वामम्। भगः। वामम्। देवः। करूळती ॥२४॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 23 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
(आदुरे) शत्रुओं के नाश करनेवाले राजन् ! (करूळती) जिसके कारीगरों की कामना करनेवाला विद्यमान वह (देवः) विजय का लेनेवाला (ते) आपके लिये (वामंवामम्) प्रशंसा करने योग्य प्रशंसा करने योग्य को (ददातु) देवे और जिसके कारीगरों की कामना करनेवाला विद्यमान वह (अर्य्यमा) न्यायाधीश (वामम्) प्राप्त होने योग्य पदार्थ दे और जिसके कारीगरों की कामना करनेवाला विद्यमान वह (पूषा) पुष्टि करनेवाला (वामम्) सेवन करने योग्य धन को दे और जिसके कारीगरों की कामना करनेवाला विद्यमान वह (भगः) ऐश्वर्य्य से युक्त (देवः) प्रकाशमान (वामम्) श्रेष्ठ विज्ञान को देवे, उन सब की आप सदा सेवा करो ॥२४॥
Essence
हे राजन् ! जो लोग सत्य उपदेश, सत्य न्याय, यथार्थ विद्या और क्रिया की आपको शिक्षा देवें, उन सब का आप निरन्तर सत्कार करो ॥२४॥ इस सूक्त में सूर्य, मेघ, मनुष्य, विद्वान् और राजा के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥२४॥ यह तीसवाँ सूक्त और तेईसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
अब विद्वानों के उपदेशविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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