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Rigveda Mandal 4 / Sukta 30 / Mantra 2

58 Sukta
24 Mantra
4/30/2
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स॒त्रा ते॒ अनु॑ कृ॒ष्टयो॒ विश्वा॑ च॒क्रेव॑ वावृतुः। स॒त्रा म॒हाँ अ॑सि श्रु॒तः ॥२॥

स॒त्रा । ते॒ । अनु॑ । कृ॒ष्टयः॑ । विश्वा॑ । च॒क्राऽइ॑व । व॒वृ॒तुः॒ । स॒त्रा । म॒हान् । अ॒सि॒ । श्रु॒तः ॥

Mantra without Swara
सत्रा ते अनु कृष्टयो विश्वा चक्रेव वावृतुः। सत्रा महाँ असि श्रुतः ॥

सत्रा। ते। अनु। कृष्टयः। विश्वा। चक्राऽइव। ववृतुः। सत्रा। महान्। असि। श्रुतः ॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 19 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! जो आप (सत्रा) सत्य आचरण के (महान्) बड़े (श्रुतः) सम्पूर्ण शास्त्र के श्रवण से यशयुक्त (असि) हो तो (ते) आपके सम्बन्ध में (सत्रा) सत्य आचरण से (कृष्टयः) मनुष्य (विश्वा) सम्पूर्ण (चक्रेव) चक्रों के सदृश अर्थात् जैसे गाड़ी में पहिया वैसे (अनु, वावृतुः) वर्त्ताव करें ॥२॥
Essence
हे राजन् ! आप न्यायकारी होवें तो सम्पूर्ण प्रजा आपके अनुकूल वर्ताव करें ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥