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Rigveda Mandal 4 / Sukta 30 / Mantra 18

58 Sukta
24 Mantra
4/30/18
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त त्या स॒द्य आर्या॑ स॒रयो॑रिन्द्र पा॒रतः॑। अर्णा॑चि॒त्रर॑थावधीः ॥१८॥

उ॒त । त्या । स॒द्यः । आर्या॑ । स॒रयोः॑ । इ॒न्द्र॒ । पा॒रतः॑ । अर्णा॑चि॒त्रर॑था । अ॒व॒धीः॒ ॥

Mantra without Swara
उत त्या सद्य आर्या सरयोरिन्द्र पारतः। अर्णाचित्ररथावधीः ॥

उत। त्या। सद्यः। आर्या। सरयोः। इन्द्र। पारतः। अर्णाचित्ररथा। अवधीः ॥१८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 22 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) राजन् आप (सद्यः) शीघ्र (त्या) उन दोनों (सरयोः) चलते हुओं के (पारतः) पार से वर्त्तमान (अर्णाचित्ररथा) पहुँचानेवाले आश्चर्य्यकारक रथों का (अवधीः) नाश करो (उत) और (आर्य्या) उत्तम गुण, कर्म्म और स्वभाववालों का पालन करो ॥१८॥
Essence
हे राजन् ! आप निरन्तर दुष्टों का ताड़न और श्रेष्ठों का सत्कार करो ॥१८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥