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Rigveda Mandal 4 / Sukta 30 / Mantra 17

58 Sukta
24 Mantra
4/30/17
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त त्या तु॒र्वशा॒यदू॑ अस्ना॒तारा॒ शची॒पतिः॑। इन्द्रो॑ वि॒द्वाँ अ॑पारयत् ॥१७॥

उ॒त । त्या । तु॒र्वशा॒यदू॒ इति॑ । अ॒स्ना॒तारा॑ । शची॒ऽपतिः॑ । इन्द्रः॑ । वि॒द्वान् । अ॒पा॒र॒य॒त् ॥

Mantra without Swara
उत त्या तुर्वशायदू अस्नातारा शचीपतिः। इन्द्रो विद्वाँ अपारयत् ॥

उत। त्या। तुर्वशायदू इति। अस्नातारा। शची३ऽपतिः। इन्द्रः। विद्वान्। अपारयत् ॥१७॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 22 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
(शचीपतिः) प्रजा वा वाणी का पति (विद्वान्) विद्वान् (इन्द्रः) और राजा जिन (तुर्वशायदू) शीघ्र वश करने और यत्न करनेवाले मनुष्य (उत) और (अस्नातारा) स्नान आदि कर्म्मों से रहित मनुष्यों को (अपारयत्) दुःख से पार उतारे (त्या) वे दोनों सुखी होवें ॥१७॥
Essence
जिन मनुष्यों को यथार्थवक्ता विद्वान् लोग शिक्षा देवें, वे दुःख के पार जाकर सुखी होते हैं ॥१७॥
Subject
अब विद्वद्विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥