Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 30 / Mantra 14

58 Sukta
24 Mantra
4/30/14
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त दा॒सं कौ॑लित॒रं बृ॑ह॒तः पर्व॑ता॒दधि॑। अवा॑हन्निन्द्र॒ शम्ब॑रम् ॥१४॥

उ॒त । दा॒सम् । कौ॒लि॒ऽत॒रम् । बृ॒ह॒तः । पर्व॑तात् । अधि॑ । अव॑ । अ॒ह॒न् । इ॒न्द्र॒ । शम्ब॑रम् ॥

Mantra without Swara
उत दासं कौलितरं बृहतः पर्वतादधि। अवाहन्निन्द्र शम्बरम् ॥

उत। दासम्। कौलिऽतरम्। बृहतः। पर्वतात्। अधि। अव। अहन्। इन्द्र। शम्बरम् ॥१४॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 21 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) तेजस्वि राजन् ! आप जैसे सूर्य्य (बृहतः) बड़े (पर्वतात्) पर्वत से (अधि) ऊपर (शम्बरम्) सुख प्राप्त होता है, जिससे उस मेघ को (अव, अहन्) नाश करता और (उत) भी प्रजाओं को पालता है, वैसे ही शत्रुओं का नाश करके (कौलितरम्) अत्यन्त कुलीन (दासम्) सेवक का पालन करो ॥१४॥
Essence
हे मनुष्यो ! जैसे सूर्य्य मेघ से जल को पृथिवी में गिरा के सब को जिलाता है, वैसे ही पर्वत के ऊपर स्थित भी डाकुओं को नीचे गिरा के प्रजाओं का पालन करो ॥१४॥
Subject
फिर सूर्यदृष्टान्त से राजविषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥